2014 की आखरी और 2015 पहली : पंक्तिया

2014 की खूबसूरत शाम और 2015 सुहानी सुबह के बीच मेरी कुछ पंक्तिया 

ये साल बन गया मिसाल, ज़िन्दगी के अनुभव में जुड़ गया और एक साल
लोग कहते है कि उम्र गयी हमारी, मै कहता हूँ कि चढ़ गया एक और सीढ़ी अनुभव की
पिता के सपनो को पूरा करो, माँ के चरणों से आनंद पाओ
बहनों के नकचड़े गुस्से को मानो हुकुम हसीं आ जायेगी कुछ पल के लिए तुम्हारे चहरे पर
हसी-ठिठोली  कर लो  अड्डे पर कुछ समय यारो के साथ
करलो वो कुछ काम जो बचपन छूट गए थे अधूरे
रोटी, कपडा और मकान लिए काम को समझो भगवान, काम को करो ना कभी नाराज़
पैसा ज़रूरी है जीवनयापन के लिए पर कमाई तुम्हारी है वो जो लोग कह गए तुम्हारी पीठ-पीछे
इन चन्द पंक्तियों में ना ढूंढो काव्य-रस ये तो है मेरे अनुभव की बस एक सीढ़ी
नए साल में नयी सदी की नींव रखो पुरानी पर खड़े होकर
सभी  के लिए नए साल की शुरुआत शानदार हो
मेरे देश में न कभी कमी हो धुप, छाँव, पानी और अनाज की
वसुदेव कुटुभकम की भावना से भारत बने फिर विश्व गुरु
नयी ऊंचाया छूने निकले फिर भारत का नौजवान
और उन सरहदी जवानो को नमन के साथ वो ताकत मिले कि
हर गोली अर्जुन के गांडीव से निकले तीर की तरह लगे दुश्मनो को
जो दुश्मन है हमारी धरती के उनको जगह सिर्फ शमशान में मिले
नए साल में सब को बहुत प्यार मिले और मेरी कलम को आपकी दुआओ का दीदार मिले
नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये – अंकित शर्मा 
Happy New Year - 2015
Happy New Year – 2015
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