शहरों का कड़वा सफ़र भाग – 2

Bhopal

तो मिया हम बात करने जा रिये है भोपाल की तो साब हम चल पड़े इंजिनियर बनने भोपाल अब मेरे साथ मेरे पिताजी उज्जैन स्टेशन से भोपाल की इंटरसिटी एक्सप्रेस पकड़ी और आ गए भोपाल, ट्रेन जैसे हे स्टेशन पर आई वैसे ही नाक में अलग से स्मेल आ गयी दिल वही ख़राब हो गया और सोचा मन में लग गयी ४ साल की तो|

अब बस पकड़ी तो बस आजू-बाजु बस वालो एक शब्द बोल रहा था “ये माकडा साइड हो ले रे”  उसी टाइम “Spider-man”  रिलीज़ होई थी मेने सोचा बड़ी famous हो गई भोपाल में तो ये पर बाद में पता चला ये तो गली है, जिनको नहीं पता उनको अब पता चल जाये और जिन को पता है वो खुश हो जाये गे|

तो ये तो थी हमारी भोपाल में एंट्री : यहाँ पर लोग लगे रहते है जुगाड़ करने में और बत्तोले बाजी में | यहाँ के पानी में ही राजनीती है मै खुद जाकर ऐसा सोच ने लग गया जैसे कही की विधान सभा में जा कर किसी विपक्षी पार्टी को घेर लो।

अब मेरा अगला स्टॉप था न्यू मार्किट जहा हमरा temporary हॉस्टल था।

वैसे में कॉलेज के अन्दर नहीं जा रहा हूँ यहाँ पे में भोपाल के बारे में बताना चाहता हूँ।

यहाँ पर  लोग बोलते “क्यों मिया किधर को तशरीफ़ ले जा रियो हो ”  मतलब समझ जाओ की यहाँ तुम को वो व्यक्ति एक चाय के चपत तो कम से कम मार के रहे गा खेर ये तो कुछ खास नहीं पर वो आप को चाय पीते – २ आप को बातो में  ये बातये गा की  यार ये तो अपने लिए २मिन. का काम है फलाना नेता अपनी पहचान का है बस ऐसा काम  मत बताना की छोटा हो , क्यों की वो बहुत बड़ा नेता है ना अछा नहीं लगता ।

अब कुछ ६ महीने निकले होगे के मै तरह – २ के लोगो से मिला कारन था किराये पर एक कमरे की तलाश बस कही जाते तो कहते हम लडको को कमरे नहीं देते, कुछ कहते हमरा पुताई का पेंट ख़राब नहीं होना चहिये कुछ तो और ही महान,  भाई किचन में खाना  मत बनाना, चलो जैसे तैसे कमरा मिला लोगो को देखने और परख ने का और  मौका मिला।

यहाँ लोग राजनीती से पैसे कमाने में २४ में से ३० घंटे लगे रहते है जहा मेने इंजीनियरिंग के साथ-२ राजनीती विज्ञानं का खास पाठ  भी पढ़ा जो मुझे अपनी लाइफ में बहुत जगह काम आया और आता रहेगा।

बाकि भोपाल में कुछ बढ़िया लोग भी मिले जैसे ऑटो वाला भईया मै  उन से लिफ्ट लेके कई बार गया ।

पर अधिकतर जनता को राजनीती में गहरा इंटरेस्ट है यहाँ तक की स्कूल में पढ़ ने वाले भी स्कूल में राजनीती करते नज़र आ जायेगे ।

इस शहर का सबसे बड़ा नेगेटिव पॉइंट है राजनीती अब यहाँ पर राजनीती का सिस्टम है या सिस्टम ही राजनीती है ये तो में ४ साल में भी नहीं समझ पाया ।

अगला शहर बहुत महशूर और बड़ा है जिस की चका – चौंध हर किसी की आँख में रोशनी भर देती है जिस का नाम है “मुंबई ”

जी हा दोस्तों अगले भाग में हम जल्दी ही मिलेगे तब तक के लिए नमस्कार । …..:)

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